Sunday, November 22, 2015

तू बस बनाले जाला

हुक्म हुआ मकड़ी को
तू बस बनाले जाला
और इन्तिज़ार कर
इसमें फंसेगा उड़ने वाला

कछुए से  कहा
चलता रह बस धीरे धीरे
तेज़ दौड़ने की कोशिश न कर
मुंह के बल गिरता है तेज़ दौड़ने वाला

Saturday, November 14, 2015

खुश्क होंटों पर हंसी रख दे

अँधेरे ताकों में रौशनी रख दे
खुश्क होंटों पर हंसी रख दे
ज़िन्दगी माना फरेब है फिर भी
उम्मीदों में एक दिलकशी रख दे
लफ्ज़ की धार तेज़ है लेकिन
लहजे में उसके चाशनी रख दे
अँधेरी रात में तनहा मुसाफिर
उसके रस्ते में चांदनी रख दे

Friday, November 13, 2015

अच्छी किस्मत सूखी रोटी

अच्छी किस्मत
सूखी रोटी
भागते भूत की लंगोटी

अब इत्मीनान
कहाँ है दुनिया में
ज़रा चूके किस्मत फूटी

मेहनत से
या मकर से
मिल जाती है दो वक़्त की रोटी

कर्मचारी की
तनख्वाह क्या
हो जाती है आमदनी मोटी

रिक्शे का मैडम
पूछ रही थी किराया
आया टैक्सी वाला हो गयी रोज़ी खोटी

इस सियासत को
तुम क्या जानो
तुम्हारी तो है बुद्धि मोटी

Wednesday, November 11, 2015

ग़ैर मुस्लिम शुअराए शाहजहाँपुर

ग़ैर मुस्लिम शुअराए  शाहजहाँपुर मुबारक शमीम और लतीफ़ रशीदी की संयुक्त पुस्तक है. इसमें उर्दू और फ़ारसी ज़बान के शायरों के कलाम  और जीवन परिचय दिया गया है. उर्दू और फ़ारसी भाषा से अनुवाद और संकलन लतीफ़ रशीदी ने किया है. इसके साथ ही शाहजहाँपुर का संछिप्त इतिहास भी शामिल है.